प्रश्नों से भरा एक मन
एक रोज़ यहाँ आ पहुँचा
कुछ रोज़ यहाँ वो ठहरा
एक रोज़ यहाँ से गुज़र गया
।
कुछ पल यहाँ पर बोए
कुछ पल यहाँ पर बीने
कुछ स्वप्न यहाँ पर टूटे
कुछ स्वप्न नए फिर बुने ।
कुछ मीत मिले कुछ गीत बने
कुछ साथ चले कुछ छूट गए
यूँही हँसते- गाते बातों बातों में
कुछ साल महीने बीत गए !
कुछ प्रश्नो के उत्तर लेकर
कुछ उलझे अनसुलझे
कुछ नए नवेले प्रश्नो संग
यादों की एक गठरी लेकर
मन एक रोज़
यहाँ से फिर गुज़र गया ।
राजीव सिंह



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