Monday, July 08, 2019

एक रोज़ यहाँ से गुज़र गया ..




प्रश्नों से भरा एक मन 
एक रोज़ यहाँ पहुँचा 
कुछ रोज़ यहाँ वो ठहरा 
एक रोज़ यहाँ से गुज़र गया   

कुछ पल यहाँ पर बोए 
कुछ पल यहाँ पर बीने 
कुछ स्वप्न यहाँ पर टूटे 
कुछ स्वप्न नए फिर बुने

कुछ मीत मिले कुछ गीत बने 
कुछ साथ चले कुछ छूट गए 
यूँही हँसते- गाते बातों बातों में 
कुछ साल महीने बीत गए

कुछ प्रश्नो के उत्तर लेकर 
कुछ उलझे अनसुलझे 
कुछ नए नवेले प्रश्नो संग 
यादों की एक गठरी लेकर 
मन एक रोज़ 
यहाँ से फिर  गुज़र गया  



राजीव सिंह 

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