Monday, July 08, 2019

आज भी ..और ना जाने कब तक...





यात्रा के एक पड़ाव पर मुझसे मिले  तुम .. 
देखकर मेरी तरफ़ मुस्कराए तो मैं भी मुस्कुरा उठा  .. 
बिना कुछ बोले दूसरी ओर तुम चलते रहे ..
अपने ही ख़यालों में गुम ..
चलता रहा मैं भी चुप चाप नज़रें झुकाए 
सोचकर की मेरे लिए मुस्कुराते होगे  .. 
ना जाने क्यूँ , कितनी दूर और कब तक .. 
चलता रहा यूँ ही 
और जब तुम्हारी ओर आया 
तो तुम वहाँ ना थे .. !

जाने मैं पीछे छूट गया ...
 या तुम आगे निकल गए ...
मेरी ही रफ़्तार कुछ तेज़ थी ...
या ..तुम अपनी रफ़्तार में थे .. 
मैं तो कहीं मुड़ा नहीं 
शायद तुम कहीं मुड़ गए हो .. !

कभी कुछ कहा नहीं तुमसे ... 
सुना तो तुम से कुछ भी नहीं .. 
तुम्हारी आवाज़ भी नहीं .. 
देखा बस तुम्हें चलते हुए , बैठे हुए , मुस्कुराते हुए , कभी कभी हँसते हुए भी ... 
कभी उदास , कभी परेशान , कभी किन्हीं ख़यालों में खोए हुए .. 
बदलते वक़्त के साथ बदलते हुए भी देखा तुम्हें .. 
सुना तुम से कुछ भी नहीं .. 
तुम्हारी आवाज़ भी नहीं ... !

लोगों से सुना तुम्हारे बारे में ... 
लोगों को सुना तुमको सुनते हुए .. 
मैंने तो बस तुम्हें देखा  था एक बार .. 
मुझे देखते हुए .. मुस्कुराते हुए .. 
और चलता रहा मैं साथ तुम्हारे .. 
तुम्हारे चले जाने के बाद भी ..... मुस्कुराते हुए.. 
आज भी ..और ना जाने कब तक !

राजीव सिंह 

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