कहाँ से चली ये लम्बी सड़क
कभी सीधी और सपाट और कभी tirchi टेढी और पथरीली
अनगिनत मुसाफिर लेकर
न जाने कहाँ तक जाती है ये लम्बी सड़क !!
कड़ी धूप और ठंढी हवा का झोंका
माथे par पसीने की बूंदे aur बारिश की रिमझिम Fuhar
कभी वीरान कभी सुनसान और कभी अनजान सहर
लम्हा लम्हा कर गुजरते दिन महीने और साल
बिना रुके बिना थके चलती जाती है ये लम्बी सड़क !!
राजीव सिंह
कभी सीधी और सपाट और कभी tirchi टेढी और पथरीली
अनगिनत मुसाफिर लेकर
न जाने कहाँ तक जाती है ये लम्बी सड़क !!
कड़ी धूप और ठंढी हवा का झोंका
माथे par पसीने की बूंदे aur बारिश की रिमझिम Fuhar
कभी वीरान कभी सुनसान और कभी अनजान सहर
लम्हा लम्हा कर गुजरते दिन महीने और साल
बिना रुके बिना थके चलती जाती है ये लम्बी सड़क !!
राजीव सिंह

