बारिश की बूंदों सी , शर्माती और सकुचाती सी
हर बात पर मुस्का देती , फूलों की पंखुरियों सी
हंसती और हंसा देती , रोती और रुला देती
इठलाती और बलखाती, बगिया में एक तितली सी..
तुम दूर होती हो तो याद आती हो !!
तुम से मिलकर तुमसे जाना , जीवन की है क्या परिभाषा
क्या होता है नदी का बहना , क्या होता है पवन का चलना
कितना गहरा सागर होगा, कितना ऊँचा अम्बर होगा
फूलों में है रस कितना, भंवरा होगा प्यासा कितना
तुम दूर होती हो तो याद आती हो..
जीवन की तिरछी, टेढ़ी , पथरीली राहों पर
आगे बढ़ते रहने की चाहत देती
तपती दोपहरी में ,THUNDH हवा के झोंके सी
और कड़ी धूप में, ठंढी शीतल छाया सी
साँझ ढले तो रात की दुल्हन , भोर होते ही नवजीवन सी
तुम दूर होती हो तो याद आती हो
हर बात पर मुस्का देती , फूलों की पंखुरियों सी
हंसती और हंसा देती , रोती और रुला देती
इठलाती और बलखाती, बगिया में एक तितली सी..
तुम दूर होती हो तो याद आती हो !!
तुम से मिलकर तुमसे जाना , जीवन की है क्या परिभाषा
क्या होता है नदी का बहना , क्या होता है पवन का चलना
कितना गहरा सागर होगा, कितना ऊँचा अम्बर होगा
फूलों में है रस कितना, भंवरा होगा प्यासा कितना
तुम दूर होती हो तो याद आती हो..
जीवन की तिरछी, टेढ़ी , पथरीली राहों पर
आगे बढ़ते रहने की चाहत देती
तपती दोपहरी में ,THUNDH हवा के झोंके सी
और कड़ी धूप में, ठंढी शीतल छाया सी
साँझ ढले तो रात की दुल्हन , भोर होते ही नवजीवन सी
तुम दूर होती हो तो याद आती हो
