
उस सफ़ेद तपती दोपहरी में
आसमानी रंग की वो ठुन्धक
आज भी कहाँ भूला हूँ
सर्दियों की वो सुबह और गुलाबी रंगो का वो मुस्कुराना
बारिश मी भीगता , सिमटता और सकुचाता हुआ हरा रंग
और गुजरती हुई सर्दी का एहसास करता वो पीला रंग
मुझे देखकर कभी हौले से मुस्कुरा देता वो नीला रंग
और कभी apnepan का एहसास करता वो बैगनी रंग
वो विदाई का narangi रंग और आज भी tees देता है
unn दिनों dikhyee दिया वो लाल रंग
Rajeev singh