Monday, September 22, 2014

जिनसे भी पथ पर स्नेह मिला...उन सबको मेरा ह्रदय प्रणाम .....!


                                                    जिनसे भी पथ पर स्नेह मिला...उन सबको मेरा ह्रदय प्रणाम....।  
  जीवन की तिरछी टेढ़ी पथरीली राहों पर, 
  पग के छालों की पीड़ा को सहलाते,
  एकाकीपन में , वीराने में , अनजाने में ,
          दो स्नेह-शब्द दे दिए जिन्होंने... उन सबको मेरा ह्रदय प्रणाम......। 

कुछ पल जो साथ रहे, कुछ दूरी  तक जो साथ चले, 
जिनके  के पग कुछ तेज़ चले, जिनसे मेरे पग कुछ तेज़ चले ,
चाहे कुछ पल का स्नेह  रहा.…चाहे कुछ दूरी तक का  साथ रहा, 
थपकी , झपकी, भपकी उन  सबकी, 
न होती तो  कैसे और कितना चल पाता,
कहना कठिन बहुत है,,, 
पथ के वो पहचाने छूट गए.
 कुछ टूट गए , कुछ रूठ गए ,
कुछ छटक गए कुछ भटक  गए.. 
पर यादो  की गठरी छोड़ गए.. 
आभारी हूँ  उन सबका भी , दे गये व्यथा का जो  प्रसाद मुझे 

पर जिनसे भी पथ पर स्नेह मिला...उन सबको मेरा ह्रदय प्रणाम .....!

                                              
                                             राजीव सिंह 




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