महक उठा मन देखो फिर आया है मधुमास
बहक उठा तन देखो आया फिर है मधुमास
उलझा मन ह्रदय बेचैन
उलझा सा जीवन पथ ...
उलझ चुके थे रिश्तों के सब तार
तब आया बसन्त , फागुनी गीत लिए
कानों में गुनगुन, नयनों में प्रीत लिए
फूंक दिए प्राण फिर जीवन पंथ पर
महक उठा मन देखो ,फिर आया है मधुमास
अंबर की छांव तले, फिर छाया है उल्हास
कण कण में घुलने लगा है जीवन का सार
जड और चेतन सबको मिला फिर से सुखमय आधार
तृप्त हुआ अन्तरमन आदि और अनन्त में
महक उठा मन देखो फिर आया है मधुमास
बहक उठा तन देखो फिर आया है मधुमास
राजीव सिंह

1 comment:
Amazing lines !!!
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