अंतर ध्वनि
अंतर्मन के पथ पर..........
Saturday, October 29, 2011
.याद तुम्हारी ..!
मन के
अंधियारे में जलती,
एक दीप सी,
आँखों से छु लेती ...
पोर पोर में जैसे
फुलझड़ियाँ लिख देती....
घोर अमावास के प्रस्ठों पर
चाँद दीप सी ..
बस्ती जब सो जाती
याद तुम्हारी सुने घर में
शहनाई सी गाती ...
भीड़ भरे इस कोलाहल में
एक मौन सीप सी.......
... है याद तुम्हारी ..!
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