Tuesday, October 11, 2011

इस बार मिली तो .......


कई बार, तेज़ रफ़्तार से जाते हुए ..मैंने उसको देखा था ..आस भरी नज़र से,  मेरी तरफ देखते हुए ..मानो.. मुझसे कहती थी,  कुछ पल के लिए ही  सही,   मुझे साथ ले लो ..तुम्हे सुकून मिलेगा ..दिल में एक हूक  सी  उठती पर कभी उसके साथ  रह सकूं, ये हो न सका  ....हमेशा सोचता.. कुछ दूर और चल लूं फिर पूरा जीवन इसके  साथ ही  रहना है  ..और अक्सर उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जाता था ...


आज कल कई दिनों से.. वो दिखाई नहीं देती, ..न जाने कहाँ चली गयी, ...कुछ खोया खोया सा लगता है,...एक सूनापन सा ...आस पास एक खालीपन सा दीखता है, .. जीवन की इस आपाधापी में , अब सिर्फ उसकी यादें हैं..!

कई बार, जब दौड़ते दौड़ते ,शरीर और मन, दोनों ही  थक जाते हैं, तो उसकी  याद बहुत आती है ,..जाने कहाँ है.. दूर दूर तक दिखाई नहीं देती है ,.. सड़क के इस पार, ना उस पार, शायद रूठ गयी होगी, इतना अनदेखा जो किया ...काश एक बार मिल जाती ..!



आज कल बड़े ध्यान से.. अपने चारो ओर.. देखता चलता हूँ ..रुक रुक कर कुछ खोजता चलता हूँ... जाने कहाँ, किस मोड़ पर, जीवन की इन तिरछी टेढ़ी पथरीली राहों में , किसी किनारे पर, मुड़ी ,तुड़ी , पड़ी हुई मिल जाये ... इस बार मिली, तो झट से उठा लूँगा ,और कुछ पल  फुर्सत के साथ गुजार लूँगा ...

राजीव सिंह 

3 comments:

Anonymous said...

lovly poem...god bless u..

Neide said...

bonito

Rajeev Singh said...

thanks